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असतो मा सद्गमय तमसो मा ज्योतिर्गमय मृत्योर्मा अमृतं गमय। हे प्रभु! हमें असत्य से सत्य की ओर, अंधकार से प्रकाश की ओर और मृत्यु से अमरता की ओर ले चलो।
दिन ढलने पर ईश्वर के चरणों में एक दिया जलाकर पूरे दिन की कृपा के लिए धन्यवाद करें। आभार से भरा हृदय ही सच्चा मंदिर है।
यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः। जहाँ नारी का सम्मान और आदर होता है, वहाँ देवता स्वयं निवास करते हैं और समस्त कार्य सफल होते हैं।
दीपक का धर्म है जलते रहना और अंधकार को मिटाना। अपने जीवन को ऐसा बनाएं कि आपकी उपस्थिति से दूसरों का जीवन भी प्रकाशित हो।
गर्व से कहो हम सनातनी हैं! जो सत्य, प्रकृति-प्रेम, विश्व-कल्याण और त्याग का मार्ग दिखाए, वही शाश्वत सनातन धर्म है।
अन्नं न निन्द्यात् तद् व्रतम्। अन्नदान महादानम्। किसी भूखे को अन्न खिलाना सबसे बड़ा यज्ञ और ईश्वर की सच्ची सेवा है।
जहं संतों की संगति, तहं प्रभु का वास। मंदिर केवल पत्थरों की इमारत नहीं, बल्कि हमारे अंतर्मन की शुद्धि और शांति का केंद्र है।
गुरु बिनु भवनिधि तरइ न कोई। जो बिरंचि संकर सम होई। जीवन में सही मार्गदर्शक और गुरु की कृपा के बिना सच्चा ज्ञान असंभव है।
आदित्यस्य नमस्कारं ये कुर्वन्ति दिने दिने। आयुः प्रज्ञा बलं वीर्यं तेजस्तेषां च जायते। प्रत्यक्ष देव भगवान भास्कर को नित्य प्रणाम करें।
तुलसी कल्याणी नमोस्तुते। जिस घर के आंगन में पावन तुलसी का वास होता है, वहां नकारात्मक ऊर्जा और अकाल मृत्यु का भय कभी नहीं रहता।
पृथिवी शान्तिरापः शान्तिरोषधयः शान्तिः। वनस्पतयः शान्तिर्विश्वेदेवाः शान्तिः। प्रकृति, जल, वायु और वनस्पति में शांति का वास हो।
विद्या ददाति विनयं विनयाद्याति पात्रताम्। ज्ञान अहंकार को मिटाकर विनम्रता लाता है, और विनम्रता से ही व्यक्ति समाज में पूज्य बनता है।
अतिथिदेवो भव। जो अपने द्वार पर आए अतिथि का आदर और सत्कार करता है, उसके घर में देवी लक्ष्मी और भगवान का साक्षात् वास होता है।
अहिंसा परमो धर्मः धर्महिंसा तथैव च। सभी जीवों पर दया भाव रखें। किसी असहाय को कष्ट न पहुंचाना ही सच्ची ईश्वर भक्ति है।
गंगे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति। नर्मदे सिन्धु कावेरि जलेऽस्मिन् संनिधिं कुरु। पावन तीर्थों और पवित्र नदियों का वंदन!
धर्मो रक्षति रक्षितः। जो धर्म की रक्षा करता है, धर्म उसकी रक्षा करता है। अपने कर्तव्यों और नैतिक मूल्यों के प्रति सदा निष्ठावान रहें।
ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्। उस प्राणस्वरूप, तेजस्वी परमात्मा का ध्यान करें जो हमारी बुद्धि को प्रेरित करे।
सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत्। सभी सुखी हों, सभी निरोगी हों।
अयं निजः परो वेत्ति गणना लघुचेतसाम्। उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्। समस्त संसार एक परिवार है, सभी के प्रति सद्भाव रखें।
ॐ द्यौः शान्तिरन्तरिक्षं शान्तिः। ईश्वर का स्मरण ही समस्त व्याधियों, भयों और अशांति का एकमात्र निवारण है। ॐ नमः नारायणाय।