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हे नाथ! नारायण वासुदेव! जीवन की अंतिम घड़ी तक मेरी जिह्वा पर केवल आपका नाम रहे, यही मेरी सबसे बड़ी प्रार्थना है। जय श्री कृष्णा!
ईश्वर से कुछ मांगना हो तो केवल उनका प्रेम मांगिए, क्योंकि जहां प्रेम है वहां संसार की हर समृद्धि अपने आप खिंची चली आती है।
नीलांचल निवासाय नित्याय परमात्मने। बलभद्र सुभद्राभ्यां जगन्नाथाय ते नमः। जगन्नाथ स्वामी नयन पथगामी भवतु मे।
माखन चुराया सो ठीक था, पर तुमने तो हमारा दिल भी चुरा लिया चितचोर कन्हैया! तुम्हारे चरणों में ही मेरी दुनिया है।
जो समय आने पर पीछे हटना जानता है, वही विजय का सूत्रधार बनता है। जय भगवान रणछोड़राय!
शरद पूर्णिमा की दिव्य चांदनी में जो महारास रचाया, वह जीवात्मा का परमात्मा से शाश्वत मिलन है। जय श्री नटवर नागर!
हे कृष्ण! हे यादव! हे सखेति! तुम्हारी कृपा से ही यह संसार गतिमान है। हर सांस में केवल तुम्हारा ही सुमिरन रहे।
राधे नाम की महिमा ऐसी, भव से पार लगावे। जो एक बार राधे पुकारे, कान्हा दौड़े आवे। जय श्री राधे!
जब कन्हैया तुम्हारे साथ हैं, तो कोई भी परिस्थिति तुम्हें हरा नहीं सकती। अपने कर्म पर अडिग रहो, परिणाम प्रभु संभालेंगे।
राजाओं के राजा, त्रिलोकीनाथ भगवान श्री द्वारकाधीश के चरणों में समस्त सुख और शांति समाहित है। जय द्वारकाधीश!
बड़ा नटखट और मनमोहक है मेरे बांके बिहारी का रूप। जो एक बार इनके नैनों में झांक ले, वह सदा के लिए इनका हो जाता है।
सच्ची मित्रता और निष्काम प्रेम की मिसाल हैं मेरे माधव। जिन्होंने निर्धन सुदामा को बिना मांगे तीनों लोकों का ऐश्वर्य दे दिया।
हारे का सहारा, बाबा श्याम हमारा। जो कन्हैया के चरणों में शीश झुका दे, उसकी नैया कभी मझधार में नहीं डूबती।
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे। कलियुग में केवल हरि नाम ही भवसागर से पार लगाने वाला है।
इंद्र का घमंड तोड़कर जिन्होंने उंगली पर गोवर्धन उठा लिया, उन भक्तवत्सल गिरधारी कन्हैया को बारंबार प्रणाम।
जिसके सिर पर मेरे सांवरिया का हाथ है, उसे इस जग में किसी और सहारे की आवश्यकता नहीं। जय श्री कृष्णा!
गौ सेवा से ही कृष्ण कृपा संभव है। जहां गौ माता का सत्कार होता है, वहां सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। — गोपाल
जब कन्हैया की बांसुरी बजती है, तो संसार का हर दुख मिट जाता है। सब चिंताएं छोड़ो और मुरलीधर के ध्यान में लीन हो जाओ।
जो माखन की चोरी कर प्रेम बांटते हैं, उन नटखट बाल गोपाल के चरणों में मेरा शत-शत वंदन। जय कन्हैया लाल की!
प्रेम का अर्थ पाना नहीं, स्वयं को समर्पित कर देना है। जहां निस्वार्थ समर्पण है, वहीं श्री राधा-कृष्ण का वास है।
सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज। सब चिंताएं छोड़कर केवल मेरी शरण में आ जाओ, मैं तुम्हें सभी दुखों से मुक्त कर दूंगा।
सच्चा सुख दूसरों को सुख देने में है। जो निस्वार्थ भाव से सेवा करता है, वही ईश्वर के सबसे करीब होता है।
मुस्कुराना सीखो हर परिस्थिति में, क्योंकि जो ईश्वर पर भरोसा रखते हैं, उनकी मुस्कान कोई छीन नहीं सकता। — कान्हा
जब संसार तुम्हारा साथ छोड़ दे, तब समझ लेना कि केशव ने तुम्हारी डोर अपने हाथों में थाम ली है।